नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।१।।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।२।।

समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम् ।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् ।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।३।।

।। भारत माता की जय ।।

2 comments so far

  1. मैने कई बार अपने मुसलमान दोस्तों से यह सवाल पूछा कि उनका आर०एस०एस० के बारे में क्या सोचना है ?
    और दूसरा सवाल यह कि वे क्यों आर०एस०एस० की शाखाओं में जाना पसन्द नहीं करते ?

    मेरे मुसलमान मित्र मेरे बारे मे अच्छी तरह जानते हैं कि मै आर०एस०एस० का स्वयम सेवक हूं और स्थानीय शाखा में जाता रहता हूं /

    मेरे मित्र इस बात को स्वीकार करते हैं कि आर०एस०एस० सन्गठन बुरा नहीं है / मेरे आर०एस०एस० के स्वयम सेवक होने को वे अच्छा कहते है /

    शाखा न जाने के पीछे का उनका तर्क है कि मुसलमान सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के सामने सिर झुकाते है और उनकी ही इबादत करते है / शाखा में ध्वज के सामने सिर झुकाया जाता है तथा ध्वज प्रणाम करते हैम , यह सब उनके मजहब के खिलाफ और शरियत के उसूलों के खिलाफ है / शाखाओं में की जाने वाली प्रार्थना “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे…..” उनके मजहब के अनुकूल नहीं है /

    इस कारण से मुसलमान भाई आर०एस०एस० से परहेज करते है / कुछ मुसलमान इसे साम्प्रदायिक सन्गठन मानते है लेकिन बहुत से इसे राष्ट्रवादी सन्गठन स्वीकार करते है /

  2. ABHIJIT THOSAR on

    R.S.S. एक वो संस्था है जिसने हिन्दुस्थान को सही मायनेसे जिंदा रखा है


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