हिन्दी कौमी तराना

आजाद हिन्द फोज में कर्नल हबीबुर रहमान सहीत कई मुस्लीम सैनिक थे, इस लिए नेताजी सुभाषचन्द्र ने सम्भावित टक्कराव को टालने के लिए वन्देमातरम के स्थान पर जन-गण-मन को अपनाया तथा कुछ समय बाद इस का हिन्दी अनुवाद सम सुख चैन तैयार करवाया जीसे हिन्दी कौमी तराना नाम दिया गया. इस की संगीतमय धून केप्टन रामसिंह ने तैयार की थी.

सम सुख चैन की बरखा बरसे
भारत भाग है जागा
पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा उत्कल बंग
चंचल सागर विंध्य हिमालय नीला जमुना गंगा
तेरा मिल गुण गाएं
तुझसे जीवन पाएं
सब तन पाएं आशा
सूरज बन कर जग पर चमका भारत नाम सुभागा
जय हो जय हो
जय जय जय जय हो
सब के दिल में प्रीत बरसे तेरी मीठी वाणी
हर सूबे के रहने वाले हर मजहब के प्राणी
सब भैद-ओ-फर्क मिटा कर
सब गोद मे तेरी आके
गूंथे प्रेम की माला
सूरज बन कर जग पर चमका भारत नाम सुभागा
जय हो जय हो
जय जय जय जय हो
सुबह सवेरे पन्ख पखेरू तेरे ही गुण गाएं
बर भारी भरपूर हवाएं जीवन में ऋतु लाएं
सब मिल का हिन्दी पुकारें
जय आजाद हिन्द के नारे
प्यारा देश हमारा
सूरज बन कर जग पर चमका भारत नाम सुभागा
जय हो जय हो
जय जय जय जय हो
भारत नाम सुभागा

1 Comment »

  1. जोगलिखी » Blog Archive » सूरज बन कर जग पर चमका Said:

    on January 23, 2007 at 4:41 pm

    [...] रामसिंह ने तैयार की थी. सम्पूर्ण गीत यहाँ पढ़ सकते है. (ऑडियो लिंक पता हो तो कृपया [...]

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